अक्सर आपने किताबों में पढ़ा और भाषणों में सुना होगा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन क्या आपको पता है, कि हमारे देश की 68% यानी आधे से ज्यादा आबादी आज भी गांवों में ही रहती है. ग्रामीण भारत की ये आबादी हमारे देश को आगे ले जाने में अपनी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ये बात अभी बहुत सारे लोगों की समझ से परे है.
मूलरुप से राजस्थान के रहने वाले मनीष के. प्रह्लाद (Manish k. Prahlad) ने अपने स्टार्टअप वरडेंट इंपैक्ट (Verdant Impact) की शुरुआत साल 2020 में की थी. वरडेंट इंपैक्ट के माध्यम से को-फाउंडर (Co-Founder) मनीष ने (मवेशियों) पशुओं के स्वास्थ्य को ठीक करने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों की आमदनी को भी दोगुना करने का काम किया है, जो ग्रामीण भारत में निवास करने वाली महिलाओं और किसानों जैसी एक बड़ी जनसंख्या वाली आबादी को भी आर्थिक रुप से सशक्त बनाने का काम कर रहा है.
कैसे बदलाव ला रहा है वरडेंट इंपैक्ट?
अगर आपने गांव की लाइफस्टाइल को जिया होगा, या खेती किसानों को नज़दीक से देखा होगा, तो आपको ये बात जरुर मालूम होगी कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों का खेती के बाद दूसरी सबसे बड़ी आजीविका पशुपालन होती है. लेकिन ये पशुपालन का काम काफी कठिन और आर्थिक जोखिम से भरा हुआ है.
अक्सर जब पशुपालन करने वाले लोग अपनी जमापूंजी इकट्ठा करके पशुओं की खरीद करते हैं, तो कई बार ऐसा होता है कि उनके पशु बीमार हो जाते हैं, या तो पशुओं में संक्रमण का फैल जाता है, या फिर मवेशियों की चोरी हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में एक समान्य पशुपालक को बड़े आर्थिक जोखिम का सामना करना पड़ता है.
वरडेंट इंपैक्ट के को-फाउंडर मनीष के. प्रह्लाद ने किसानों की इसी समस्या को समझा और जमीनी स्तर पर इसका सॉलिड समाधान निकाला है.
अनपढ़ नहीं पीएचडी स्कॉलर है ये किसान
आज भी जब कहीं किसान या किसानी की बात होती है तो हमारे दिमाग में किसानों को लेकर अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोगों की इमेज़ क्रिएट होती है, जोकि अब ऐसा सोचना मिथ्या या भ्रम में रहने जैसा है. आपको जानकार हैरानी होगी कि जानवरों और पशुओं के लिए काम करने वाले मनीष कुमार कोई परांपरागत किसान नहीं हैं, बल्कि जब उन्होंने इस मुहिम की शुरुआत की तब वह पीएचडी कर रहे थे.
मनीष का मानना है कि आज के वर्तमान समय में कैपिटलिज़्म ही नया सोशलिज़्म है, जो कि काफी हद तक सच भी है. गौरतलब है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी मानना था, कि साधन ही साध्य के निर्णायक होते हैं. यानी किसी काम को मुकाम तक ले जाने के लिए उसमें काम आने वाले साधनों की बेहद अहम भूमिका होती है.
मनीष ने भी इन्हीं विचारों को आगे बढ़ाने के लिए पशुपालक किसानों के राजकीय और केंद्रीय सरकारी योजनाओं की अवेयरनेस, तकनीक से पशुओं को जोड़ने का प्रयास और पशुओं के संवर्धन की व्यवस्था जैसे कई अमूल-चूल बिंदुओं पर काम करने की मुहिम छेड़ी और उसे एक सफल आयाम दिया है.
अब तक कैसा रहा है ‘वरडेंट’ का ‘इंपैक्ट’?
Startup Vibes18 पॉडकास्ट के दौरान जब वरडेंट के को-फाउंडर मनीष के. से ये पूछा गया, कि आपके इस पूरे काम से अब तक समाज में क्या बदलाव हासिल हुआ है? तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, “भारत में खेती-किसानी से होने वाली आमदनी पर पुरुषों का अधिकार होता है, लेकिन हमारे समाज में एक अलिखित व्यवस्था यह भी है कि पशुओं से होने वाली आमदनी कहीं ना कहीं महिलाओं के हिस्से में रहती है. इसीलिए लाइवस्टॉक की प्रॉब्लम को समझकर पुरुष किसानों के साथ-साथ महिलाओं को भी एंपावर या आत्मनिर्भर करने का आइडिया आया. मेरा मानना है कि यदि हमें किसानों की आय (Farmer Income) में बढ़ोत्तरी करनी है तो सबसे पहले ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बना होगा. इसी का परिणाम है कि आज वरडेंट की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद से करीब 45000 लीटर दूध का उत्पादन महिला किसान कर रही हैं, जिसमें कई महिलाएं तो अपनी कंपनी बना चुकी हैं और कई संगठनात्मक रुप से काम करके कंपनी की डायरेक्टर या को-फाउंडर भी बन चुकी है.”
साथ ही मनीष यह भी कहते हैं, कि “वरडेंट ने ही सबसे पहले लाइवस्टॉक (livestocks) सेक्टर में महिलाओं की चुनौतियों की पहचाना और फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) बनाने का काम किया है, जिसकी मदद से हैंडहोल्डिंग करते हुए बड़ा इंपैक्ट लाने का सार्थक प्रयास हुआ है.”
गौरतलब है, कि आज की तारीख में भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन चुकी है. इसकी एक सबसे बड़ी वजह है लगातार देश में तेज़ी से बढ़ती स्टार्टअप्स की संख्या. व्यापार और स्वरोजगार की ओर बढ़ते युवाओं के रुझान को देखते हुए केंद्र सरकार भी इनोवेशन, सीड फंडिंग योजना, मुद्रा योजना जैसे माध्यमों से आर्थिक सहायता प्रदान करके ‘स्टार्टअप इंडिया’ मिशन को प्रोत्साहित कर रही है, जिसका लाभ किस तरह लिया जा सकता है, उस बारे में स्टार्टअप वाइब्स18 पॉडकास्ट के दौरान मनीष के. ने बहुत खुलकर और आसान भाषा में बातचीत की है.
भारत देश में नवाचार केवल कुछ ही क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बहुत दूर-दूर तक पहुंच गया है और लगभग सभी सेक्टर्स में अपनी पकड़ बना चुका है. सरकार की ओर से भी यह बताया गया है कि उनकी ओर से लगभग 56 अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में समस्याओं को हल करने वाले स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई है, जिनमें से 13% IT सर्विसेस, 9% हेल्थ और लाईफ साइंस, 7% शिक्षा, 5% कृषि और 5% खाद्य और पेय पदार्थों में शामिल हैं.
डिपार्टमेंट फॉर प्रोमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड के अनुसार वर्तमान समय में देश में करीब 1 लाख 12 हजार 718 से अधिक स्टार्टअप आधिकारिक तौर पर काम कर रहे हैं, साथ ही लगातार इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है. इनमें से 100 से ज्यादा स्टार्टअप ऐसे भी हैं जो यूनिकॉर्न बन चुके हैं.
एग्रीटेक स्टार्टअप ‘वरडेंट इंपैक्ट’ की पूरी कहानी देखने और सुनने के लिए ज़रूर देखें पॉडकास्ट स्टार्टअप वाइब्स18.
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FIRST PUBLISHED : March 12, 2024, 16:28 IST