हाइलाइट्स
2024 में पहली बार कुन्हीकन्नन को अरबपतियों की लिस्ट में शामिल किया गया है.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (NIT) मैसूर से इलेक्ट्रॉनिक्स में डिग्री ली थी.
साल 1988 में एक कंपनी केयन्स टेक्नोलॉजी (Kaynes Technology) बनाई थी.
नई दिल्ली. कहते हैं किस्मत चमकने के लिए बस एक मौका काफी होता है. कई बार यह मौका जल्दी मिल जाता है और कई बार इसके लिए सालों का इंतजार करना पड़ता है. ऐसा ही कुछ हुआ रमेश कुन्हीकन्नन के साथ, जिन्हें अपनी किस्मत चमकाने के लिए 36 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा और किस्मत भी चमकाई चंद्रमा ने. भारत ने जब अपना चंद्रयान-3 मिशन शुरू तो रमेश की कंपनी को इसका बहुत फायदा मिला. असर ये हुआ कि साल 2024 में पहली बार कुन्हीकन्नन को देश के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल किया गया है.
रमेश कुन्हीकन्नन अब 60 साल के हो चुके हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (NIT) मैसूर से पढ़ाई करने के बाद खुद का काम करने की सोची. कुन्हीकन्नन ने साल 1988 में एक कंपनी केयन्स टेक्नोलॉजी (Kaynes Technology) बनाई, जिसे नवंबर, 2022 में बाजार में लिस्ट भी करा दिया गया. 4 अप्रैल, 2024 को फोर्ब्स की ओर से जारी अरबपतियों की लिस्ट में पहली बार कुन्हीकन्नन का नाम शामिल किया गया है. फोर्ब्स के अनुसार, अभी कुन्हीकन्नन की कुल संपत्ति करीब 10,000 करोड़ रुपये की है. उनकी कंपनी Kaynes Technology का मार्केट कैप आज करीब 17,181 करोड़ रुपये पहुंच गया है.
क्या काम करती है कंपनी
Kaynes Technology इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाती है. चंद्रयान-3 मिशन के दौरान इस कंपनी को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की सप्लाई का काम मिला था. इस कंपनी ने प्रज्ञान और विक्रम लैंडर दोनों के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सप्लाई किया था. 23 अगस्त, 2023 को जब चंद्रयान मून पर लैंड हुआ तो Kaynes Technology के शेयरों में जबरदस्त उछाल आना शुरू हो गया. इस कंपनी में कुन्हीकन्नन की करीब 64 फीसदी हिस्सेदारी है. गुरुवार 4 अप्रैल को NSE पर इस कंपनी के शेयरों की कीमत 2,688 थी.
16 महीने में 4 गुना बढ़ी कीमत
Kaynes Technology और रमेश कुन्हीकन्नन की किस्मत चंद्रयान के बाद किस कदर बदल गई, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 16 महीने में इस कंपनी के शेयरों की कीमत 4 गुना बढ़ चुकी है. 25 नवंबर, 2022 को इस कंपनी के स्टॉक की कीमत 745.15 रुपये थी, जो 4 अप्रैल, 2024 को यह स्टॉक करीब 2,700 पर जाकर बंद हुआ है. इसका मतलब हुआ कि हर 4 महीने में इसकी कीमत दोगुनी हो गई.
क्या है कंपनी की सबसे बड़ी खूबी
कुन्हीकन्नन की पत्नी सविता रमेश ने भी कंपनी को खड़ी करने में काफी मदद की. सविता ने साल 1996 में कंपनी ज्वाइन की थी और आज बतौर चेयरपर्सन अपनी सेवाएं दे रही हैं. कुन्हीकन्नन को इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विस इंडस्ट्री में काम करने का करीब 33 साल का अनुभव है. उनकी कंपनी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बनाने में सबसे खास है. आज उनकी कंपनी 350 क्लाइंट को अपने प्रोडक्ट सप्लाई करती है. ये क्लाइंट दुनियाभर से हैं, जो ऑटो, एयरोस्पेस और मेडिकल इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए हैं.
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FIRST PUBLISHED : April 4, 2024, 19:51 IST