0 बैंक बैलेंस से ₹100 करोड़ तक का सफर, बिहार जाकर मिला आइडिया, कैसे 3 दोस्त बना रहे अंडों का अमूल

हाइलाइट्स

एगोज 100 करोड़ से ऊपर का रेवेन्यू जेनरेट कर रही है.
कंपनी फिलहाल प्रॉफिट में नहीं है.
एगोज के अंडे आम अंडों से महंगे हैं.

नई दिल्ली. संडे हो मंडे रोज खाओ अंडे. यह लाइन हम लोगों के दिमाग में बैठी हुई है. यह वाक्य अंडों की अहमियत को हमारे जीवन में दर्शाने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है. अंडे प्रोटीन के सबसे उत्तम स्रोत में से एक हैं. ना सिर्फ प्रोटीन बल्कि अन्य न्यूट्रीएंट्स भी इसमें भरपूर मात्रा में होते हैं. इसी अंडे को अपना बिजनेस बनाकर 3 आईआईटीयन कुछ क्रांतिकारी बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं.

अभिषेक नेगी, उत्तम कुमार और आदित्य कुमार तीनों दोस्त हैं और एगोज के को-फाउंडर है. एगोज दावा करती है कि वह हर्बल फीड पर पोषित मुर्गियों के अंडे बाजार में ला रही है जिससे लोगों को बेहतर प्रोटीन सोर्स मिल सके. इनके अंडे आम अंडों से कुछ महंगे हैं. ऐसा क्यों है और क्यों लोगों को एगोज के अंडे लेने चाहिए, इसी तरह के कुछ सवाल हमने को-फाउंडर अभिषेक नेगी से किए. नीचे आप पूरा इंटरव्यू पढ़ सकते हैं.

सवाल- अंडे का ही बिजनेस क्यों करने के बारे में सोचा, एगोज का आइडिया कैसे आया?
जवाब- पहला मोटिवेशन पर्सनल था. मुझे अंडे खाना बहुत पसंद हैं. मैं अंडे को किसी भी तरह बनाकर खा सकता हूं. दूसरा मोटिवेशन है बिजनेस. इंडिया में अंडे के बिजनेस में काफी संभावनाए हैं. भारत में हर दिन 35-40 करोड़ अड़े कंज्यूम किये जा रहे हैं. यह खपत हर साल 15-16 परसेंट बढ़ रही है. हर 8-9 साल में अंडों की खपत डबल हो रही है. इस लिहाज से यह बहुत बड़ा मार्केट है. लेकिन इस क्षेत्र में कोई ब्रांडेड ऐग कंपनी नहीं है जो मेट्रो सिटीज में स्टैंडर्ड के अंडे उपलब्ध कराए. हम अंडों का अमूल बनने का प्रयास कर रहे हैं.

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सवाल- अगर 40-45 करोड़ अंडों की खपत भारत में डेली है तो इसमें अभी आपकी क्या हिस्सेदारी है?
जवाब- अभी 40 करोड़ अंडों के सामने तो काफी कम है. हम नए स्टार्टअप हैं. हम अभी हर दिन करीब 4 लाख अंडों को सेल कर रहे हैं. वार्षिक आधार पर हम 100 करोड़ अंडों की सेल कर रहे हैं. टोटल मार्केट 1 लाख करोड़ अंडों का है. उस लिहाज से हम छोटे हैं लेकिन हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.

सवाल- आपकी अंडों की एक क्रेट और एक नॉर्मल किराना स्टोर पर मिलने वाली क्रेट के रेट में 100-120 रुपये का अंतर है. आप इसे कैसे संभालेंगे. लोग आपकी कंपनी के अंडे क्यों खरीदेंगे?
जवाब- मार्केट में खुले तौर पर जो अंडे अभी मिल रहे हैं जो थोड़े सस्ते हैं वह फ्रेश नहीं हैं. वह 10-15 दिन पुराने हैं. उनमें कई तरह के एंटीबायोटिक्स इस्तेमाल किये गए हैं. इसलिए वह सुरक्षित भी नहीं हैं. वहीं, एगोज के अंडे हर्बल फीड पर पल रही मुर्गियों द्वारा प्रोड्यूस किये जा रहे हैं. हमारे अंडे हर्बल हैं. हमारी कंपनी के अंडे फ्रेश होते हैं. मुर्गी के अंडा देने से मार्केट में पहुंचने तक का सफर मात्र एक दिन में पूरा कर लिया जाता है. 3-4 दिन में ये अंडे सेल हो जाते हैं. हमारे अंडे फ्रेश हैं, इनसे खराब महक नहीं आती, आपको ऑरेंज योक (अंडे के अंदर वाला हिस्सा) मिलता है जिसकी न्यूट्रीशन वैल्यू पीले वाले योक से अधिक होती है.

eggoz success story exclusive full interview with co founder abhishek negi tells the story of branded egg startup

एगोज फैक्ट्री.

सवाल- आपकी टारगेट ऑडियंस क्या है. आप किन लोगों को ये केटर करना चाहते हैं?
जवाब- हां, अभी हम एक खास ऑडियंस को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ रहे हैं. फिलहाल हम यंग पेरेंट्स, विशेषकर यंग मदर्स पर केंद्रित होकर प्रोडक्ट्स ला रहे हैं. हम इन्हें अच्छा प्रोटीन सोर्स उपलब्ध कराना चाह रहे हैं.

सवाल- क्या आप इस प्राइस के साथ ऐसा कर पाएंगे, खास तौर पर छोटे शहरों की अगर बात करें तो?
जवाब- अभी हमारे जो ऐग्स हैं उनका रेट 12-13 रुपये प्रति पीस है. लेकिन हम अब एक और अफोर्डेबल रेंज लॉन्च की है जिनकी कीमत 8-9 रुपये होगी. यह अंडे दिल्ली-एनसीआर और बेगंलुरु में होलसेल के जरिए लॉन्च हो चुकी है.

सवाल- अफोर्डेबल और प्रीमियम रेंज के अंडों में अंतर क्या है?
जवाब- सबसे पहला अंतर है साइज का. प्रीमियम अंडों का साइज थोड़ा बड़ा होता है. जिसकी वजह से प्रोटीन कॉन्टेंट बढ़ जाता है. अफोर्डेबल रेंज के अंडे सामान्य साइज के होते हैं. अफोर्डेबल रेल में आपको न्यूट्रीशन एक अंडे में जितना होना चाहिए उतना मिलेगा. प्रीमियम अंडों में यह थोड़ा बढ़ जाएगा. हालांकि, दोनों ही अंडे हर्बल, फ्रेश और 11 सेफ्टी चेक से क्लीन होकर ही आगे जाएंगे, ये एगोज का प्रॉमिस है.

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एगोज फैक्ट्री.

सवाल- आप क्वालिटी कैसे सुनिश्चित करते हैं?
जवाब- हम किसानों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं. देशभर में हमारे साथ 15-20 किसान काम कर रहे हैं. हम किसानों के साथ यह समझौता करते हैं कि आपको फीड (मुर्गी का खाना) हमारे हिसाब से रखनी होगी. हमारी बताई गई फीड वगैरह उन्हें इस्तेमाल करनी होती है. किसानों को एआई की मदद से भी कई बातें हमारे द्वारा बताई जाती हैं. हमारे साथ काम करने से उनकी इनकम में भी इजाफा आया है.

सवाल- आप कैसे चेक करते हैं कि किसान वही फीड दे रहा जो आप उसे बता रहे हैं.
जवाब- हमारा किसानों के साथ 100 फीसदी अंडे खरीदने का टाइअप होता है. वे जो भी अंडे प्रोड्यूस करते हैं उसे हम खरीदते हैं इसलिए उन्हें उसी तरह से अंडे प्रोड्यूस करने होते हैं जैसी हमारी डिमांड है. इस बात को सुनिश्चित करने के लिए हमारे फार्म एग्जीक्यूटिव हर दिन फार्म्स पर जाते हैं और चेक करते हैं. यह करीब 10 लोगों की टीम है. दूसरा, यह कि अगर योक का कलर ऑरेंज है या नहीं ये चेक किया जाता है.

सवाल- कंपनी के फाइनेंस के बारे में कुछ बताइए, आपका ताजा रेवेन्यू और प्रॉफिट क्या है?
जवाब- हमने कंपनी 2017 में शुरू की थी और 3 साल बिहार में पोल्ट्री फार्मिंग की. 2020 में एगोज ब्रांड लॉन्च हुआ. अभी कंपनी का रेवेन्यू करीब 100 करोड़ रुपये है. कंपनी अभी मुनाफे में नहीं है. 8-9 महीने में हम प्रॉफिटेबल हो जाएंगे. फंडिंग की बात करें तो हम 5 राउंड्स में 101 करोड़ रुपये की फंडिंग ले चुके हैं.

सवाल- आगे आप क्या प्रोडक्ट लाएंगे. अगले 5 साल के लिए आपका क्या विजन है?
जवाब- हमने जनवरी में 3 नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं जो दुनिया के पहले इस तरह के प्रोडक्ट हैं. ऐग मोमोज, ऐग नगेट्स और ऐग बर्गर पैटीज. यह दिल्ली-एनसीआर में उपलब्ध हैं. 5 साल में हम अपना पोर्टफोलियो और बड़ा करेंगे. हम ऐग सलानी, ऐग पाउडर व ऐग लिक्विड जैसे कई प्रोडक्ट आगे लाने वाले हैं.

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नगेट्स और मोमोज.

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सवाल- अपनी जर्नी के बारे में कुछ बताएं, यहां तक पहुंचने में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
जवाब- मैंने पहला स्टार्टअप रोडर नाम से किया था. यह एक कैब कंपनी थी. इसे 2014-2017 तक चलाया. इसमें चीजें ठीक चल रही थीं. हमने फंडिंग भी उठाई थी. लेकिन डीमोनेटाइजेशन ने हमें जोर का झटका दिया. कैश की समस्या काफी बढ़ गई थी. यह पूरा स्टार्टअप फेल हो गया. कंपनी बंद करनी पड़ी, लोगों को निकालना पड़ा. निवेशकों के पैसे डूब गए. इसके बाद मैंने अपने दोस्तों उत्तम और आदित्य (अन्य को-फाउंडर) से मिला. हम बिहार चले गए क्योंकि उत्तम नालंदा से है. हमने वहां एग्रीकल्चर में कई तरह के बिजनेस मॉडल ट्राई किये लेकिन कुछ चला नहीं. फिर हमारी समझ पोल्ट्री के बारे में बढ़ने लगी और हमें लगा कि यह अच्छा बिजनेस है और हमें इसमें ट्राई करना चाहिए. मेरे पास तो पैसा नहीं था क्योंकि मेरी पिछली कंपनी बंद हो गई थी. लेकिन किसी तरह फंडिंग जुटाई. हमने फंडिंग के लिए 50-60 निवेशकों की ना सुनी है. फिर भी किसी तरह हम आगे बढ़ते रहे. 3 साल किसी तरह चले.

लेकिन फिर कोविड-19 आया जब ये अफवाह फैल गई कि अंडे या चिकन आपकी सेहत के लिए हानिकारक है. अंडे बिकना बंद हो गए. मुर्गियां भी हम नहीं बेच पा रहे थे. लेकिन हमें इम्पलॉइज को पैसे देने थे. हम किसी तरह इस सिचुएशन से भी बाहर आए और 2020 में हमें पहली फंडिंग मिली लेकिन इससे भी कंपनी की आर्थिक स्थिति कोई बहुत ज्यादा नहीं सुधरी. हमने अभी तक इस कंपनी के लिए 3-4 ऐसे अनुभव देख लिए हैं जब ये कंपनी बस बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी. हमारा बैंक बैलेंस लगभग जीरो हो चुका था. लेकिन सही टाइमिंग, सही पार्टनर और सही इन्वेस्टर्स के कारण हम इन सब परेशानियों से आगे बढ़ गए हैं और अब हम 100 करोड़ के रेवेन्यू को पार कर रहे हैं.

सवाल- किसान को आपके साथ काम करने पर क्या फायदा है?
जवाब- हम किसान से अंडों को एनईसीसी रेट पर लेते हैं जो हर दिन नए रेट जारी करती है. अगर यह रेट 5 रुपये है तो हम किसानों को 5.20 या 5.30 रुपये देते हैं. नॉर्मल मार्केट में उन्हें एनईसीसी से कम रेट मिलेगा. लेकिन हमारे साथ जो किसान काम करते हैं उन्हें आम मार्केट के मुकाबले 50-60 पैसे प्रति अंडे का फायदा मिलेगा.

सवाल- क्या एगोज का आईपीओ आएगा?
जवाब- हां, आईपीओ आएगा. यह हमारा एम्बीशन है. लेकिन इस बारे में अभी हम कुछ ज्यादा नहीं कह पाएंगे कि ये कब आएगा. लेकिन यह जरूर होगा कि हम अपने बिजनेस में पब्लिक को भी शामिल करें.

Tags: Business ideas, Business news in hindi, Success Story

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