वफादारी की परख नमक से होती है। या तो इंसान नमक (Salt) हलाल होता है या नमक हराम! गरीबों को जब सब्जी नहीं मिलती तो नमक और प्याज के सहारे रोटी खा लेते हैं। मुंशी प्रेमचंद ने ‘नमक का दरोगा’ नामक कहानी लिखी थी जो काफी प्रसिद्ध हुई थी। महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह कर अंग्रेजों को चुनौती दी थी। फिलहाल मुद्दा भारत की दरियादिली का है। वह अभावग्रस्त पड़ोसी देशों की मदद करने में तत्पर रहता है। मालदीव के प्रधानमंत्री मुइज्जू भारत विरोधी रवैया अपना रहे थे और अपने देश में तैनात भारतीय सैनिकों को वापस भेजने के लिए अड़ गए थे। इतने पर भी भारत ने मालदीव को भारी मात्रा में आवश्यक वस्तुएं भेजीं।
इसके तुरंत बाद वह श्रीलंका को मदद पहुंचाने जा रहा है। इसके पहले भारत ने संयुक्त अरब अमीरात को 10,000 टन प्याज भेजा। बहुत अच्छा होगा यदि हमारी सरकार नेपाल, श्रीलंका और मालदीव को प्याज की बजाय नमक की खेप भेजें। ऐसा इसलिए क्योंकि जब इन देशों की नीयत में फर्क आए तो हम उन्हें नमक हराम कह सकें। नमक का अत्यंत महत्व है। इसके बगैर दाल, सब्जी, चटनी किसी भी चीज में स्वाद नहीं आ सकता। महाकवि भूषण ने एक बार खाने में नमक नहीं होने की शिकायत की तो उनकी भाभी ने ताना कसा कि ऐसा है तो जाकर नमक ले आओ। भूषण को बात लग गई। वे तुरंत घर से निकल गए और छत्रपति शिवाजी महाराज के दरबार में आए।
वहां उन्होंने वीर रस का काव्य ‘शिवाबावनी’ सुनाया जिसे सुनकर महाराज अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें सोने की अशर्फियों के उपहार के साथ राजकवि का दर्जा दिया। भूषण वापस जब उत्तर प्रदेश के अपने गांव पहुंचे तो भाभी के लिए 7 गाड़ियों में भरकर नमक ले गए। ऐसा था भूषण का स्वाभिमान! रोम के सैनिकों को वेतन के रूप में साल्ट या नमक दिया जाता था इसलिए वेतन को सैलरी कहा जाने लगा।
आजकल डाक्टर नमक और शक्कर दोनों को व्हाइट पॉयजन या सफेद जहर बताकर कम खाने को कहते हैं। हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को कम नमक खाने की सलाह दी जाती है। फिल्म ‘नमक हराम’ में राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और रेखा ने अभिनय किया था जबकि फिल्म नमक हलाल में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, परवीन बॉबी थे। फिल्म शोले में गब्बरसिंह से एक डाकू कहता है- सरकार मैंने आपका नमक खाया है जिस पर गब्बरसिंह कहता है- ‘‘तो अब गोली खा!’’